Saturday, September 29, 2018

नन्दा देवी अल्मोड़ा~Nanda Devi Temple -Place to Visit Almora

नन्दा देवी अल्मोड़ा~Nanda Devi Temple -Place to Visit Almora

अल्मोड़ा जिले के पवित्र स्थलों में “नंदा देवी मंदिर” का विशेष महत्व है । नंदा के सम्मान में कुमाऊँ और गढ़वाल में अनेक स्थानों पर मेले लगते हैं । 1670 में कुमाऊं के चंद वंशीय शासक राजा बाज बहादुर चंद ने बधाणगढ़ के किले से नंदादेवी की स्वर्ण प्रतिमा लाकर अपने मल्ला महल (वर्तमान कलक्ट्रेट) परिसर में प्रतिष्ठित किया और अपनी कुलदेवी के रूप में पूजना शुरू किया। नन्दादेवी से जुडी जात (यात्रा) दो प्रकार की हैं। वार्षिक जात और राजजात। वार्षिक जात प्रतिवर्ष अगस्त-सितम्बर मॉह में होती है। जो कुरूड़ के नन्दा मन्दिर से शुरू होकर वेदनी कुण्ड तक जाती है और फिर लौट आती है, लेकिन राजजात 12 वर्ष या उससे अधिक समयांतराल में होती है। मान्यता के अनुसार देवी की यह ऐतिहासिक यात्रा चमोली के नौटीगाँव से शुरू होती है और कुरूड़ के मन्दिर से भी दशोली और बधॉण की डोलियाँ राजजात के लिए निकलती हैं। इस यात्रा में लगभग २५० किलोमीटर की दूरी, नौटी से होमकुण्ड तक पैदल करनी पड़ती है। इस दौरान घने जंगलों पथरीले मार्गों, दुर्गम चोटियों और बर्फीले पहाड़ों को पार करना पड़ता है।

अल्मोड़ा का नंदादेवी मेले का अपना खासा महत्व है। कहा जाता है कि इस मेले का आयोजन राजा बाज बहादुर चंद को युद्ध में विजय प्राप्त होने के बाद से किया जाता है। अल्मोड़ा नगर के मध्य में स्थित ऐतिहासिकता नंदादेवी मंदिर में प्रतिवर्ष भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को लगने वाले मेले की रौनक ही कुछ अलग है । मेले के अन्तिम दिन परम्परागत पूजन के बाद, नवमी के दिन माँ नंदा और सुनंदा को डोलो में बिठाकर अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रो में शोभायात्रा के रूप में निकाली जाती है | नंदा देवी को नव दुर्गा के रूप में से एक बताया गया है | अल्मोड़ा में मां नंदा की पूजा-अर्चना तारा शक्ति के रूप में तांत्रिक विधि से करने की परंपरा है। मां नंदा के दर्शन मात्र से ही मनुष्य ऐश्वर्य को प्राप्त करता है तथा सुख-शांति का अनुभव करता है | "JAI MAA NANDA DEVI"


नन्दा देवी अल्मोड़ा~Nanda Devi Temple -Place to Visit Almora



Nanda Devi Temple is situated in Almora main market. Every 12 years, Nanda Devi Raj Jat is the most popular celebration of the area where devi Nanda, in the form of sheep- decorated with ornaments, food, and clothing- is sent to her home Trishul peak with music, local folk songs and dances. It is very ancient and beautifully built. The Nanda Devi Mandir was built by the Chand Rajas. The temple is located in Almora town above the Mall Road. You need to park vehicle on roadside and take route going via the wholesale market for walking about some meters from the main road. The temple is named after the famous himalayan peak nanda devi. If you can go there at evening time you can see the "Arati" which is great. This temple is highly famous for Nanda Devi Fair that is held in Almora every year in the month of September on the Ashtami of Bhadra Shukla.

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Monday, March 26, 2018

{चिपको आन्दोलन - Chipko Movement} Know About Uttarakhand

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से

पेड को काटने से बचाने के लिये उससे चिपकी ग्रामीण महिलाएँ

चिपको आन्दोलन एक पर्यावरण-रक्षा का आन्दोलन है। यह भारत के उत्तराखण्ड राज्य (तब उत्तर प्रदेश का भाग) में किसानो ने वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए किया था। वे राज्य के वन विभाग के ठेकेदारों द्वारा वनों की कटाई का विरोध कर रहे थे और उन पर अपना परम्परागत अधिकार जता रहे थे।

यह आन्दोलन तत्कालीन उत्तर प्रदेश के चमोली जिले में सन १९७३ में प्रारम्भ हुआ। एक दशक के अन्दर यह पूरे उत्तराखण्ड क्षेत्र में फैल गया। चिपको आन्दोलन की एक मुख्य बात थी कि इसमें स्त्रियों ने भारी संख्या में भाग लिया था। इस आन्दोलन की शुरुवात १९७३ में भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुन्दरलाल बहुगुणा, चण्डीप्रसाद भट्ट तथा श्रीमती गौरादेवी के नेत्रत्व मे हुई थी:

'चिपको आन्दोलन' का घोषवाक्य है-

    क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार।
    मिट्टी, पानी और बयार, जिन्दा रहने के आधार।

सन १९८७ में इस आन्दोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार (Right Livelihood Award) से सम्मानित किया गया था।


प्रतिभागियों

चिप्को की सबसे प्रमुख विशेषताओं में से एक महिला ग्रामीणों की व्यापक भागीदारी थी। उत्तराखंड की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी के रूप में, महिलाओं को पर्यावरणीय गिरावट और वनों की कटाई से सबसे अधिक प्रभावित किया गया था, और इस तरह इन मुद्दों से संबंधित आसानी से। चिप्को की विचारधारा से इस भागीदारी पर असर पड़ता है या कितना प्रभावित हुआ है, अकादमिक सर्किलों में इस पर बहस हुई है।
इस के बावजूद, महिला और पुरुष दोनों कार्यकर्ताओं ने गौड़ादेवी, सुदेश देवी, बच्ची देवी, चंडी प्रसाद भट्ट, सुंदरलाल बहुगुणा, गोविंद सिंह रावत, धूम सिंह नेजी, शमशेर सिंह बिष्ट और घनसीम रतुरी, चिप्को कवि सहित आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई। , जिसका गीत अभी भी हिमालय क्षेत्र में लोकप्रिय हैं इनमें से 1 9 82 में चांडी प्रसाद भट्ट को रमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया, [21] और 2009 में सुंदरलाल बहुगुणा को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
{चिपको आन्दोलन - Chipko movement}


From Wikipedia, the free encyclopedia


The Chipko Movement or Chipko Andolan refers to a forest conservation movement. Chipko type movement dates back to 1730 AD Brahmaiah M from Bellary when in khejarli village of Rajasthan, 363 people(Bishnoi's) sacrificed their lives to save khejri trees. In modern India it began in 1973 and went on to become a rallying point for many future environmental movements all over the world it created a precedent for starting of nonviolent protest in India, and its success meant that the world immediately took notice of this non violent movement, which was to inspire in time many such eco-groups by helping to slow down the rapid deforestation, expose vested interests, increase ecological awareness, and demonstrate the viability of people power. Above all, it stirred up the existing civil society in India, which began to address the issues of tribal and marginalized people.

Today, beyond the eco-socialism hue, it is being seen increasingly as an ecofeminism movement. Although many of its leaders were men, women were not only its backbone, but also its mainstay, because they were the ones most affected by the rampant deforestation, which led to a lack of firewood and fodder as well as water for drinking and irrigation. Over the years they also became primary stakeholders in a majority of the afforestation work that happened under the Chipko movement. In 1987, the Chipko movement was awarded the Right Livelihood Award.[6] The chipko aandolan is a movement that practised the Gandhian methods of Satyagraha where both male and female activists played vital roles, including Gaura Devi, Sudesha Devi, Bachni Devi and Chandi Prasad Bhatt.

Participants

Participants of the first all-woman Chipko action at Reni village in 1974 on left jen wadas, reassembled thirty years later.
One of Chipko's most salient features was the mass participation of female villagers. As the backbone of Uttarakhand's Agrarian economy, women were most directly affected by environmental degradation and deforestation, and thus related to the issues most easily. How much this participation impacted or derived from the ideology of Chipko has been fiercely debated in academic circles.
Despite this, both female and male activists did play pivotal roles in the movement including Gaura Devi, Sudesha Devi, Bachni Devi, Chandi Prasad Bhatt, Sundarlal Bahuguna, Govind Singh Rawat, Dhoom Singh Neji, Shamsher Singh Bisht and Ghanasyam Raturi, the Chipko poet, whose songs are still popular in the Himalayan region. Out of which, Chandi Prasad Bhatt was awarded the Ramon Magsaysay Award in 1982, and Sundarlal Bahuguna was awarded the Padma Vibhushan in 2009.



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Sunday, March 25, 2018

स्याही देवी मंदिर उत्तराखंड Syahi Devi -Place to Visit in Almora
स्याही देवी मंदिर उत्तराखंड Syahi Devi -Places to Visit in Almora

Syahi Devi Temple in Sitalakhet
Syahi Devi Temple is tourist attraction in Sitlakhet, Hawalbag Block in Almora District of Uttarakhand State. Syahi Devi Temple is located 36 km from Almora,and 4 kms from Sitalakhet gives a panoramic view of the Himalayas. The Devi statue is very very old and so is the Kali statue on the side., which is the presiding goddess, worshipped by the local people.
Syahi Devi nearby Villages are Dhamas, Sidhpur, Dhatwal Gaon, Chan, Dal. Sitlakhet is also famous for its orchards, amazing landscapes,and its produce of herbs and medicinal plants. The hike to the temple gives a panoramic view of the Himalayas. This is the best place of almora district with complete vew of himalaya. 

{Syahi Devi Mandir Almora-स्याही देवी मंदिर अल्मोड़ा उत्तराखंड}




स्याही देवी मंदिर उत्तराखंड Syahi Devi -Places to Visit in Almora

स्याही देवी टेम्पल शीतलाखेत

स्याही देवी मंदिर, शीतलाखेत, उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में हवालबाग ब्लॉक में पर्यटक आकर्षण है। स्याही देवी मंदिर अल्मोड़ा से 36 किमी दूर स्थित है, और शीतलाखेत से 4 किमी दूर हिमालय का मनोरम दृश्य देता है।
देवी की मूर्ति बहुत पुरानी है और इसी तरफ काली प्रतिमा भी है, जो कि प्रथा की देवी है, स्थानीय लोगों द्वारा पूजा की जाती है। स्याही देवी के पास के गांव धमस, सिढ़पुर, ढटवाल गाओं, छान, है। शीतलाखेत अपने बगीचे, अद्भुत परिदृश्य, और जड़ी बूटियों और औषधीय पौधों के अपने उत्पादन के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर में की ओर ऊपर पहाड़ी पर चढ़ना हिमालय का एक विशाल दृश्य देता है| हिमालय के पूरे दृश्य के साथ यह अल्मोड़ा जिले का सबसे अच्छा स्थान है।


Syahi devi is the best place to visit in almora uttarakhand. This is the place to visit in kumaon uttarakhand. The temple is also come in 10 best places to visit in almora. Here you can find many tourist places to visit in almora. Syahi devi mandir you can also come in places to visit in almora in monsoon weather also. It is also the best places in almora to visit in summer. But if you are planning for places to visit in almora in winters like this temple, then you must carry your warm clothes or winter clothes. Apart from this syahi devi mandir there is also very different religious places to visit in kumaon almora. Read our blog for latest updates and also watch the video, link given above.

Tuesday, February 13, 2018

श्री टपकेश्वर मंदिर देहरादून-Tapkeshwar Mahadev Place to Visit in Dehradun
श्री टपकेश्वर मंदिर देहरादून-Tapkeshwar Mahadev Place to Visit in Dehradun

Shri Tapkeshwar Mandir (श्री टपकेश्वर मंदिर) is Famous Temple in GarhiCantt,Dehradun,Uttarakhand,India. (located 7 km from Dehradun City).
You can reach to Tapkeshwar Mandir by local vehicle like bus.you will have to some walk around to reach temple beside the river. (form the main entrance)
During Shivratri a large fair held here around tapkeshwar temple.There are lots of people come there to worship. Inside the temple (in cave) a natural shivling is situated and water drops drip down on the Shivalinga.(hence, it was named as Tapkeshwar Temple)
The beautiful Tapkeshwar Mahadev temple is situated between hills along the banks of a river which imparts it a unique sanctity. This cave was once resided by the famous guru Dronacharya  (teacher of Pandavas and Kauravas)according to Mahabharat written by ved vyas and hence is also famous as Drona cave.
 It's a wonderful spiritual place to spend the day. Darshan of Vaishno Devi through the Caves gives a feeling of total surrender to the God. Here is also small hilly river wher you can enjoy.


श्री टपकेश्वर मंदिर देहरादून-Tapkeshwar Mahadev Temple in Dehradun

 टपकेश्वर महादेव मंदिर एक लोकप्रिय गुफा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। टपकेश्वर महादेव मंदिर जहाँ हमेशा शिव लिंग पर जल टपकता है| इस अद्भुत चमत्कार के कारण ही इसे टपकेश्वर कहा जाता है। यह देहरादून से 6.5 किमी दूर गढ़ी कैंट क्षेत्र में नदी के तट पर स्थित है। शिव भक्तों के लिए यह एक महत्वपूर्ण स्थान है। यहां भगवान शंकर अपने भकतों की हर मनोकामना पुरी करतें हैं|
एक पौराणिक कथा के अनुसार, इस गुफा मंदिर के माध्यम से भगवान शिव दूध का निर्माण किया था, जो गुरु द्रोर्णाचार्य के पुत्र अश्‍वत्‍थामा को दिया था। यह कथा महाकाव्‍य महाभारत में लिखी है।
शिवरात्रि के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होने के लिए आते हैं। यहाँ मौजूद शिवलिंग स्वयं से प्रकट हुआ है.

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Shri Tapkeshwar Mahadev Mandir is the best place to visit in dehradun uttarakhand. It is situated near garhi cantt area.This is the place to visit in garhwal uttarakhand. The temple is also come in 10 best places to visit in dehradun. Here you can find many tourist places to visit in dehradun. Tapkeshwa temple you can also come in places to visit in dehradun in monsoon weather also. It is also the best places in dehradun to visit in summer. But if you are planning for places to visit in dehradun in winters like this temple, then you must carry your warm clothes or winter clothes. Apart from this temple there is also very different religious places to visit in garhwal dehradun. Read our blog for latest updates and also watch the video, link given above. 

Monday, October 10, 2016

Uttarakhandi Jokes पहाड़ी जोक्स उत्तराखंडी चुटकुले

Uttarakhandi Jokes पहाड़ी जोक्स उत्तराखंडी चुटकुले
एक बार रमेश दा लड़की देखने गया!
लड़की गांव से उपर रोड साइड एक कस्बे में रहती थी. रमेश दा ने लड़की देखी - गोरी फनार लड़की ठैरी
रमेश दा तो चाइयैं रह गया लड़की को .. बोला तुमर नाम कि छ ? कतु तक पढाई कर रे ?
लड़की - कमुली ठैरा मेरा नाम .. हाइस्कूल में तीन नम्बर से थर्ड डिबिजन रुक गयी ठैरी अलबेर .. बोर्ड का सैन्टर रनकारों ने कथप दूसरे ईसकूल में बना दिया ठैरा ... बाबारे . बिलकुल भी नकल नही हो रही ठैरी वहां .. गजबजाट जैसा हो गया .. फिर सारे सवाल कोर्स से भ्यैर के ठैरे .. लेख तो अच्छा बनाया ठैरा मैने ... पर नम्बर ही नहीं दिये!
...ओइज्या तुम तो चाहा पी ही नहीं रहे... पी लो नहीं तो अरडी जाएगी ..
रमेश दा- किलै पहाड़ी बुलाण नि उन तुमकैं...?
लड़की - समझ जाने वाली ठैरी .. पर बोलना नहीं आने वाला ठैरा .. मैं तो नानछना बटी यहीं रही ठैरी... गांव तो अप्पर पास करने तक ही रहे ठैरे .. अब वहां जाना कम ही होने वाला हुवा .. हर इतवार चले गये तो चले गये .. क्या ठैरा गांव में भी...
रमेश दा- घरक काम करण और पहाड़ी खाण बड़ूण तो उने हुनेल तुमकैं .. जसि मडुव रोट .. भटक चुरकाणि .. भटिया...राजण ..वगैरह ..
लड़की - ना हो .. नी आता ये बनाना .. एक बार ईजा ने बनाया था मडुवे का रोटा ओर भटिया .. देखकर ही वाक्क जैसी हो जाने वाली हुई ...
ब्या के बाद तो दिल्ली ही रहना ठैरा तुम्हारे साथ ..फिर ये भटिया वटिया सीखकर क्या करना ठैरा..
रमेश दा ने मन ही मन कहा बाबाहो .. कहां फस गया यार .. और ब्या का खयाल मन से निकालकर बोला अब तो अगले साल ही देखी जाऐगी बल...😜😜

 

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Sunday, October 2, 2016

Rampur Tiraha Kand - रामपुर तिराहा कांडःKnow About Uttarakhand

Rampur Tiraha firing case

रामपुर तिराहा गोलीकाण्ड

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से

रामपुर तिराहा गोली काण्ड पुलिस द्वारा उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के आन्दोलनकारियों पर उत्तर प्रदेश के रामपुर क्राॅसिंग, मुज़फ्फरनगर जिले में की गई गोलीबारी की घटना को कहते हैं।
आन्दोलनकारी, पृथक उत्तराखण्ड की माँग के समर्थन में, दिल्ली में धरना प्रदर्शन के लिए जा रहे थे, जब अगले दिन, बिना उकसाए उत्तर प्रदेश पुलिस ने १ अक्टूबर, १९९४ की रात्रि को आन्दोलनकारियों पर गोली चला दी, जिसके कारण सात आन्दोलनकारियों की मृत्यु हो गई और कुछ महिलाओं के साथ कथित रूप से छेड़खानी और दुष्कर्म किया गया। घटना के समय मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री थे।
http://uttaranchalhills.blogspot.com/2016/10/rampur-tiraha-kand.html




Rampur Tiraha firing case

From Wikipedia, the free encyclopedia
The Rampur Tiraha firing case refers to police firing on unarmed Uttarakhand statehood activists at Rampur Tiraha (crossing) in Muzaffarnagar district in Uttar Pradesh in India on the night of 1–2 October 1994.
The activists, part of the agitation for the separate state of Uttarakhand, were going to Delhi to stage a dharna, a sit-in protest at Raj Ghat on Gandhi Jayanti, the following day, when alleged unprovoked police firing in the night of 1 October led to the death of six activists, and some women were allegedly raped and molested in the ensuing melee. Mulayam Singh Yadav was Chief Minister of Uttar Pradesh, when the incident occurred.

Case history

  • 1994: First Information Reports (FIRs), entails that the activists damaged public property, burnt shops and vehicles and tried to force their way through the barricades, forcing A.K. Singh, who was present at the spot, to order firing, leading to the death of six activists and several others getting injured.[1]
  • 1995: The Allahabad High Court orders the Central Bureau of Investigation (CBI) on 12 January, to probe into the issue, taking cognizance of the Uttarakhand Sangharsh Samiti's petition. The CBI later, examines 72 witnesses and files cases against 28 police personnel.[2] All the accused face charges under sections 376 (rape), 392 (robbery), 354 (assault or criminal force on women), 332 (voluntarily causing hurt), 509 (intent to insult the modesty of women) and 120 (b) (criminal conspiracy) of the Indian Penal Code (IPC).[3] Though initially, the State government, then headed by Mulayam Singh Yadav, ordered a judicial inquiry by a retired judge, Justice Zaheer Hassan, which reported, 'the use of force was just and reasonable'.[1] Later, at the Uttarakhand High Court, the CBI admitted, "The case of the CBI in the charge-sheet is that the petitioner and other police officers under the garb of checking tried to stop the rallyists from going to Delhi, provoked them to resort to violence and when they dispersed after the use of rubber bullets, the remaining few protesters were unnecessarily shot dead." [1]
  • 2000: Rajnath Singh, Chief Minister of Uttar Pradesh under Section 197 of the Criminal Procedure Code (CrPC) in November, refuses CBI the permission to prosecute then district magistrate Muzaffarnagar, Anant Kumar Singh.[1]
  • 2003: July: Uttarakhand High Court quashes the CBI charge sheet and absolved then district magistrate Muzaffarnagar, Anant Kumar Singh in criminal proceedings.[4] Motivation by a widespread public uproar, the State government soon filed for a review petition, which resulted in the High Court recalling its own earlier order.[1] November: A CBI special court has convicted two Uttar Pradesh State police officials and a constable for killing a man while firing indiscriminately on a crowd of Uttarakhand demonstrators in 1994. The Sub-inspector, Ramesh Chand Chowdhary was sentenced to rigorous imprisonment for two years and fined Rs 2,000 while the other two — Anil Singh Manral and Bhopal Singh were awarded a seven years’ rigorous imprisonment and fined Rs 5,000 each.[5]
  • 2005: A special CBI Judicial Magistrate, at Moradabad in Uttar Pradesh acquits the four police personnel had been accused of tampering with police records after the firing over alleged rioters.[6]
  • 2007: July: A special CBI court in Muzaffarnagar acquittes, Rajendra Pal Singh, then city Superintendent of Police, in connection with the alleged police firing, refusing the agency permission to prosecute him without the Uttar Pradesh governor's consent. After prior refusal of the State Government to prosecute him, CBI later prosecutes him on a statement of co-accused in the case, Rajbir Singh, who was then the SHO of Chapar police.[2]
  • 2007: October: Uttarakhand Chief Minister Bhuwan Chandra Khanduri, visited the 'Shahid Smarak' at Rampur Tiraha at Muzaffarnagar, and announced that the state government will pursue all the five pending court cases, with greater dedication.[7]

Legacy

The incident left an indelible mark on the agitation for the state of Uttarakhand and eventually led to the partition of the state of Uttar Pradesh in 2000.[citation needed]
The Uttarakhand State government has built a 'Shahid Smarak' (Martyr's Memorial) at the Rampur Tiraha, the site of the incident, and a memorial function is observed here, each year.[7]

*info collect from https://en.wikipedia.org/wiki/Rampur_Tiraha_firing_case




Rampur Tiraha Kand - रामपुर तिराहा कांडः
रामपुर तिराहा गोलीकाण्ड: अक्टूबर 1994
Rampur Tiraha firing case
रामपुर तिराहा गोलीकाण्ड
रामपुर तिराहा गोली कांड:
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रामपुर तिराहा कांड के शहीदों
Tribute To Uttarakhand Movement Martyr's Rampur Tiraha
 
Rampur Tiraha firing case